दिल-ए-संगीन-ए-ख़ुसरौ पर भी ज़र्ब-ए-कोहकन पहुंची — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Even upon Khusrau's heart of stone the mountain-digger's blow has fallen; If he struck his pick against the mountain's peak, what did that striking matter?”
अर्थ
ख़ुसरौ के पत्थर जैसे कठोर दिल पर भी कोहकन (फ़रहाद) की चोट पहुंच गई; अगर उसने तेशे से पहाड़ की चोटी पर वार किया तो उसमें क्या बड़ी बात थी।
विस्तार
यह शेर फ़रहाद की मशहूर कहानी पर आधारित है, वह आशिक़ जिसने अपनी महबूबा के लिए तेशे से पहाड़ काट डाला। शायर यहाँ एक सुंदर बात कहता है। वह कहता है कि फ़रहाद की असली उपलब्धि पत्थर काटना नहीं थी। उसके तेशे की सच्ची चोट तो ख़ुसरौ के पत्थर जैसे कठोर दिल तक पहुँची, जिसने उस सख़्त और ताक़तवर बादशाह को भी हिला दिया। पहाड़ पर तेशा मारना तो कोई बड़ी बात नहीं थी। असली बात यह है कि उसके जुनून और मेहनत ने उससे कहीं ज़्यादा कठोर चीज़ को पिघला दिया, एक पत्थर का दिल। यह शेर प्रेम और लगन की ख़ामोश ताक़त की तारीफ़ करता है।
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