किसे ये ताब जो उस की तजल्ली में रहे ठहरा रुमूज़-ए-तौर लाती है सजन तेरी कमर मू सी

“Who has the strength to stand steadfast before that dazzling radiance? / Beloved, your waist, slender as a hair, evokes the mystic secrets of Mount Sinai.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

किसमें यह सामर्थ्य है जो उसके दिव्य तेज के सामने अडिग खड़ा रह सके? हे प्रिय, बाल जैसी अत्यंत पतली तुम्हारी कमर कोह-ए-तूर के रहस्यों की याद दिलाती है।

विस्तार

शायर महबूब के हुस्न के नूर से पूरी तरह बेखुद है और उसकी तुलना कोह-ए-तूर की उस रूहानी रोशनी से करता है जिसे सहना किसी के बस में नहीं था। क्लासिकी शायरी में महबूब की कमर को बाल के बराबर बारीक यानी 'मू-सी' कहा जाता है, पर यहाँ शायर ने एक बेहद दिलकश लफ़्ज़ी खेल खेला है—'मू-सी' सुनने में हज़रत 'मूसा' जैसा लगता है जिन्होंने तूर पहाड़ पर इलाही जलवे देखे थे। इस तरह महबूब की नाज़ुक कमर एक ऐसा तिलिस्मी राज़ बन जाती है, जिसके हुस्न की ताब कोई आशिक़ नहीं ला सकता।

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