उस के रुख़्सार देख जीता हूँ आरज़ी मेरी ज़िंदगानी है

“I live only by gazing upon her cheeks; fleeting—and cheek-bound—is this life of mine.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

मैं उसके रुख़्सार (गाल) देखकर जीता हूँ; मेरी ज़िंदगी आरज़ी (अस्थायी या गालों पर निर्भर) है।

विस्तार

इस शेर का सारा हुस्न 'आरज़ी' लफ़्ज़ के ख़ूबसूरत खेल में छुपा है। एक मानी में 'आरज़ी' का अर्थ अस्थायी या नाज़ुक है, यानी आशिक़ की ज़िंदगी चंद लम्हों की है। वहीं दूसरा अर्थ 'आरिज़' यानी रुख़्सार से जुड़ा है, जिसका मतलब है कि उसकी ज़िंदगी का पूरा दारोमदार ही महबूब के गालों के दीदार पर है। महबूब की एक झलक पर अपनी साँसों को टिका देना और ज़िंदगी की इस बेबसी को मुस्कुराते हुए बयां करना ही इस शेर की जान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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