सिर्फ़ सूरत का बंद नईं 'नाजी' आशिक़-ए-साहब-ए-मआनी है

“Naji is not bound to outward form alone; he is a lover of the master of inner meaning.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

'नाजी' केवल बाहरी सुंदरता या रूप-रंग का गुलाम नहीं है, बल्कि वह आंतरिक अर्थ और गुणों के धनी का प्रेमी है।

विस्तार

नाजी बहुत सादगी से समझाते हैं कि उनका इश्क़ सिर्फ़ बाहरी रूप-रंग और चेहरे की खूबसूरती का कैदी नहीं है। वे तो उस महबूब के दीवाने हैं जिसके भीतर विचारों की गहराई, रूहानी एहसास और असल मायने ('मआनी') मौजूद हैं। यह शेर हमें याद दिलाता है कि सच्चा प्यार केवल जिस्मानी कशिश तक सीमित न रहकर दिल और रूह के असल हुस्न की तलाश करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.