चर्ब है शम्अ पर जमाल उस का शम्अ की रौशनी ज़बानी है

“Her radiant beauty far outshines the candle's glow; the flame's bright boast is merely of the tongue.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

उसका सौंदर्य शमा (मोमबत्ती) पर भारी है और श्रेष्ठ है, जबकि शमा की रोशनी तो महज़ बातों तक ही सीमित है।

विस्तार

इस शे’र में शायर ने कमाल की लफ़्ज़ी कारीगरी दिखाई है—पुराने दौर में शम्अ चर्बी से बनती थी और उसकी लौ को 'ज़बान' कहा जाता था। इसी रियायत से शायर कहता है कि महबूब का हुस्न शम्अ की चमक पर पूरी तरह हावी यानी 'चर्ब' है। शम्अ का रौशन होना तो महज़ ज़बानी जमा-ख़र्च या खोखला दावा लगता है, क्योंकि महबूब के असली नूर के सामने शम्अ की कोई हक़ीक़त बाकी नहीं रहती।

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