“I would surrender my very heart and life for him, O Naji; a mere glimpse of this youth brings the blessed dawn of Ramadan's Eid.”
ऐ नाजी, मैं उस पर अपनी जान और दिल कुर्बान करता हूँ; यह लड़का ऐसा है जिसे सिर्फ देखने भर से रमज़ान की ईद जैसी खुशी मिल जाती है।
शायर नाजी यहाँ महबूब के दीदार की ख़ुशी को रमज़ान के बाद आने वाली ईद की तरह मुबारक और दिलकश बता रहे हैं। जैसे ईद का चाँद दिखते ही पूरे महीने के सब्र का फल मिल जाता है और हर तरफ़ जश्न छा जाता है, वैसे ही उस नौजवान की एक झलक देखते ही आशिक का दिल बेइंतहा मसरूर हो जाता है। इसी बेपनाह कशिश और रूहानी सुकून के सबब शायर उस पर अपनी जान और दिल ख़ुशी-ख़ुशी न्योछावर करने को तैयार है।
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