जो कोई असली है ठंडा गर्म याक़ूती में क्यूँकर हो न लावे ताब तेरे लब की जो नामर्द है ज़ाती

“How can a ruby elixir warm one who is by nature cold? / Only the truly unmanly fail to bear the burning passion of your lips.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

जो व्यक्ति स्वभाव से ही ठंडा है, वह याक़ूती जैसी बलवर्धक दवा से भी कैसे गर्म हो सकता है? उसी तरह जो पैदाइशी नामर्द है, वही तुम्हारे होठों की तपिश और गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकता।

विस्तार

यहाँ शायर माशूक़ के होंठों की शोख़ी और तपन को एक ख़ास अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। 'याक़ूती' एक प्राचीन दवा मानी जाती थी जो जिस्म में गर्मी और ताज़गी भरती थी, लेकिन शायर कहते हैं कि जिसकी फ़ितरत ही सर्द और बेजान हो, उसे यह नुस्ख़ा भी क्या गरमाएगा। माशूक़ के होंठ इतने पुरजोश और क़ातिलाना हैं कि उनकी तपिश बर्दाश्त करने के लिए सीने में सच्चा और जवां दिल चाहिए; जिसमें वो कुव्वत ही न हो, वो भला इस आग का सामना कैसे करे!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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