जो चाहो सैर-ए-दरिया वक़्फ़ है मुझ चश्म की कश्ती हर एक मू-ए-पलक मेरा है गोया घाट ख़ैराती

“If you wish to sail the river, the boat of my eye is pledged and free; each lash upon my eyelid stands as a charitable quay.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

यदि आप नदी की सैर करना चाहते हैं तो मेरी आँख रूपी नाव आपके लिए समर्पित है, और मेरी पलक का हर बाल मानो एक ख़ैराती घाट है।

विस्तार

यहाँ शायर अपने आँसुओं और इश्क़ की हद को बड़ी दिलकश तस्वीर में ढाल रहा है। वह महबूब से कहता है कि अगर तुम्हें दरिया की सैर का शौक़ है, तो मेरी आँखें कश्ती की तरह हाज़िर हैं और बहते आँसू दरिया बन चुके हैं। मेरी पलकों का हर एक बाल उस दरिया पर बना मुफ़्त का घाट है, जहाँ तुम जब चाहो बिना किसी झिझक के क़दम रख सकते हो—यह महबूब के लिए पूरी तरह ख़ुद को न्योछावर कर देने का इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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