“Gazing, O Mohan, toward your slender waist, even meaning turned back and retreated to its home.”
हे मोहन, तुम्हारी कमर की तरफ देखकर अर्थ (मानी) भी विवश होकर अपने घर वापस लौट गया।
उर्दू शायरी में माशूक़ की कमर को इतना नाज़ुक और बारीक माना गया है कि वह गोया दिखाई ही नहीं देती। यहाँ शायर बड़ी नज़ाकत और शोख़ी से कहता है कि जब 'मानी' (यानी अर्थ, या फिर ईरान का मशहूर मुसव्विर मानी) ने तुम्हारी पतली कमर को देखना चाहा, तो हैरान होकर अपने घर लौट गया क्योंकि वहाँ समझने या चित्रित करने को कुछ वजूद ही न मिला। यह महबूब के हुस्न की ऐसी दिलकश तारीफ़ है जो लफ़्ज़ों और तसव्वुर दोनों की समझ से परे निकल जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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