इक इशारेमें फ़िदा करता हो दिलको अल-ईमान तेग़-ए-अबरू का हो उसके मू ब-जौहर खुला

“At a single gesture it commands the heart to yield in sacrifice—by my faith! When every fine grain in the steel of her brow's sharp sword is laid bare.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

ईमान की कसम, महबूब के एक ही इशारे पर दिल न्योछावर हो जाता है जब उसकी भौंहों की तलवार का हर जौहर और पैनापन खुलकर सामने आता है।

विस्तार

यहाँ शायर महबूब के एक इशारे पर अपना दिल न्योछावर करने का पुरज़ोर इज़हार करता है। महबूब की ख़ूबसूरत कमान जैसी भौंहों को दमिश्क़ी फ़ौलाद की ऐसी धारदार तलवार माना गया है, जिसका हर बाल और चमकता हुआ 'जौहर' साफ़ दिखाई दे रहा हो। आशिक़ अपने ईमान की क़सम खाकर कहता है कि इस कातिल हुस्न के ज़रा से इशारे पर दिल बिना किसी हिचकिचाहट के ख़ुशी-ख़ुशी क़ुर्बान हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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