“Behold the throng of lovers in the gathering, the beloved must say; today, quite wildly, the register of the mad has opened here.”
महबूब महफ़िल में आशिक़ों की भारी भीड़ को देखकर शायद कह रहा होगा कि आज यहाँ दीवानों का पूरा दफ़्तर ही अजीब तरह से खुल गया है।
ज़रा सोचिए कि महफ़िल में एक ही माशूक़ पर जान छिड़कने वालों की भारी भीड़ जमा है, और वह खुद मुस्कुराते हुए यह मंज़र देख रहा है। शायर कल्पना करता है कि महबूब इस हुजूम को देखकर चुटीले अंदाज़ में कह रहा होगा कि आज यहाँ पागलों का पूरा दफ़्तर यानी बही-खाता ही खुल गया है। यह शेर महबूब के बेपनाह हुस्न के असर और इश्क़ की दीवानगी को एक दिलकश और शोख़ तस्वीर में पिरोता है।
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