वो आपी था साइल ऊपर पी मुजीब कहूं किस से ये राज़ मैं बरमला

“He was Himself the petitioner, and He the granter too; to whom then should I openly reveal this secret truth?”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

वह स्वयं ही याचक था और स्वयं ही पुकार सुनने वाला भी; अब मैं यह रहस्य सबके सामने किससे कहूँ?

विस्तार

यह शेर सूफ़ी फ़लसफ़े के उस गहरे भेद को खोलता है जहाँ मांगने वाला (साइल) और दुआ क़बूल करने वाला (मुजीब) दोनों असल में वही एक परम शक्ति हैं। शायर इस हक़ीक़त से रूबरू होकर हैरान रह गया है कि पुकारने वाला भी वही है और पुकार सुनने वाला भी वही। यह रूहानी सच्चाई इतनी नाज़ुक और असीम है कि इसे हर किसी के सामने खुलेआम कह पाना नामुमकिन लगता है, क्योंकि ज़ाहिरी नज़र से देखने वाली दुनिया इस भेद को समझ नहीं पाएगी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.