इस शहर का रस्म अजब तौर का यारो अदना को कोई मनाने नहीं पाता

“Strange are the customs of this city, my friends: / To soothe the hurt of the humble, no one ever bends.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

हे दोस्तों, इस शहर का दस्तूर बड़ा अजीब है कि यहाँ किसी साधारण या छोटे इंसान को कोई मनाने नहीं आता।

विस्तार

इस शेर में शायर समाज की बेरुखी और बनावटी तौर-तरीकों पर बड़ा गहरा तंज़ करता है। दुनिया का यह बेरहम दस्तूर है कि वह ताक़तवर और रुतबे वालों के नखरे उठाती है, मगर किसी आम या कमज़ोर इंसान के रूठने और उसकी तकलीफ़ की यहाँ कोई परवाह नहीं करता। यह शेर सीधे दिल को छूता है, क्योंकि यह बताता है कि इंसानी जज़्बात की कद्र भी अब हैसियत देखकर की जाने लगी है।

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