है ख़ुदा वालोंको इक मजमा में उज़लत-केश दोस्त को अपने तो देता नहीं आज़ार ख़ुदा

“He keeps the godly in seclusion, even amidst the crowd; for God would surely never bring torment upon His friend.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

ईश्वर अपने चाहने वालों को भीड़ के बीच भी एकांतवासी बनाए रखता है, क्योंकि ईश्वर अपने दोस्त को कभी कष्ट या पीड़ा नहीं देता।

विस्तार

यह शेर सूफ़ियाना मिज़ाज की उस ख़ास कैफ़ियत को बयां करता है जहाँ इंसान भीड़ में रहकर भी अंदर से बिल्कुल तन्हा और पुरसुकून रहता है। शायर का मानना है कि जो लोग ख़ुदा से मोहब्बत करते हैं, ख़ुदा उन्हें दुनिया के शोर-ओ-श़र से महफ़ूज़ रखने के लिए भीड़ के बीच भी तन्हाई की नेमत अता करता है। यह अलगाव कोई सज़ा या लाचारी नहीं बल्कि इलाही रहमत है, क्योंकि ख़ुदा अपने दोस्तों को दुनियावी उलझनों की तकलीफ़ में कभी नहीं छोड़ता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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