शबनम की तरह झलक रही है है आब-ए-हया और हवा

“It glistens softly like the morning dew; a blush of modesty and a passing breeze.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

यह ओस की बूँदों की तरह चमक रही है, जिसमें शर्म और हया की नमी तथा हवा का झोंका है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब की हया और उसकी मासूम चमक को ओस की पाकीज़ा बूँद की तरह बयां किया है। चेहरे पर शर्म व लज्जा की जो चमक (आब-ए-हया) है, वह ताज़ी हवा के झोंके के साथ मिलकर सुबह की शबनम जैसी दिलकश लग रही है। यह नज़ाकत और सादगी का ऐसा ख़ूबसूरत मंज़र है, जो बिना किसी बनावट के दिल में उतर जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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