सूत नहीं है दूर तूल इस का है तार-ए-शुआई फ़ज़ा और हवा

“No thread of cotton spans its boundless length; woven of sunbeam filaments are the open sky and air.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

इसका दूर तक फैला हुआ विस्तार सूत के धागे का नहीं है, बल्कि यह खुला वातावरण और हवा किरणों के धागों से बनी है।

विस्तार

शायर इस शेर में कायनात की बुनावट का बहुत ही ख़ूबसूरत मंज़र पेश करते हैं। वे कहते हैं कि हमारे चारों ओर फैली इस असीम फ़ज़ा का ताना-बाना किसी मामूली धागे या सूत से नहीं, बल्कि सूरज की सुनहरी किरणों और हवा से बुना गया है। यह शेर हमें अहसास कराता है कि हमारी दुनिया कितनी नाज़ुक, चमकदार और रूहानी कारीगरी से सजी हुई है।

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