“The soft down emerging upon the beloved's cheek is like a fresh breeze stirring through newly sprouted grass.”
महबूब के चेहरे पर जो यह नया ख़त (बालों का हल्का रोआँ) आया है, वह ऐसा है मानो नई उगी हुई घास में हवा का नया झोंका आ गया हो।
यहाँ शायर महबूब के चेहरे पर उभरते हुए हल्के-हल्के बालों (ख़त) की खूबसूरती को बड़े नाज़ुक अंदाज़ में बयान कर रहा है। वह इस नए हुस्न की तुलना ताज़ी उगी हुई नर्म हरी घास से करता है, जिस पर ठंडी हवा का झोंका एक नई ताजगी और रवानगी भर देता है। यह शेर सिर्फ जवानी की दहलीज पर कदम रखने का मंजर ही नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि महबूब का हर बदलता रूप आशिक़ की नज़रों में उसके हुस्न को और निखार देता है।
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