“Blessed be the night to you—how fiercely burned the flame, how stirred the breeze; within the candle's radiant glow, there breathes yet another longing.”
तुम्हें यह रात मुबारक हो कि कैसी आग जली और कैसी हवा चली; शमा की रोशनी में एक अलग ही नूर है और इस माहौल में एक अलग ही बात है।
यह शेर एक ख़ास और पुरकैफ़ रात की दास्तान बयां करता है, जहाँ 'हवा' लफ़्ज़ का बहुत खूबसूरत खेल है—जिसका मतलब हवा का झोंका भी है और मन की गहरी ख़्वाहिश भी। शायर उस रात की मुबारकबाद देते हुए कहता है कि शम्अ का यह जलना कोई आम बात नहीं, बल्कि उसकी लौ में एक अलग ही इश्क़ और कैफ़ियत बसी हुई है। यह शेर प्यार के समर्पण और उसकी पाकीज़ा चमक को बेहद गर्मजोशी से महसूस कराता है।
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