यार-ओ-मेरा रंग कचरा-ओ-सिपर न आया अब तलक मैं तो ओसको इश्क़ में रंगीन सरापा हो गया

“My beloved has still not taken to the pale hue upon my face, though steeped in love for them, I am dyed in color from head to toe.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

ऐ दोस्तो, मेरे चेहरे का रंग-रूप अब तक नहीं संभला, जबकि मैं उसके इश्क़ में सिर से लेकर पाँव तक पूरी तरह रंग गया हूँ।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपनी बेपनाह मोहब्बत और महबूब की बेरुखी का दर्द बयां कर रहा है। वह कहता है कि मैं तो उसके प्यार में सर से पैर तक पूरी तरह रंग गया हूँ, मेरी रूह और जिस्म पर उसी की चाहत का रंग चढ़ा हुआ है। मगर अफ़सोस कि महबूब को मेरी यह हालत, मेरा यह ज़र्द और ग़मगीन रंग अब तक पसंद नहीं आया और उसका दिल नहीं पसीजा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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