अक़्ल-ओ-होश-ओ-सब्र-ओ-तस्कीन हम हो शैदा तेज़ हाए सबाथी मेरी मुझसे मैं तन्हा हो गया

“Reason and senses, patience and peace, all fled in breathless haste; alas, every companion parted from me, leaving me utterly alone.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

बुद्धि, होश, धैर्य और सुकून सब मुझसे तेज़ी से छिन गए; अफ़सोस कि मेरे सारे साथी मुझसे बिछड़ गए और मैं बिल्कुल अकेला रह गया।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में शायर ने अपनी समझ, होश, सब्र और सुकून को अपने हमसफ़र और सच्चे दोस्तों की तरह पेश किया है। लेकिन इश्क़ या ग़म की शिद्दत में ये तमाम अंदरूनी सहारे एक-एक करके साथ छोड़ जाते हैं और तेज़ी से रुख़सत हो जाते हैं। यहाँ तन्हाई का सबसे दर्दनाक मंज़र उभरता है—जब बाहर की दुनिया नहीं, बल्कि इंसान की अपनी ही ख़ूबियाँ और होश-ओ-हवास उसे अकेला छोड़ देते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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