देखकर ज़ुल्फ़-ए-सियह मफ़्तून-ओ-शैदा हो गया अमील-ए-दीवाना क्या मुझको ये सौदा हो गया

“Beholding those raven tresses, I became bewitched and enamored; what madness is this strange obsession that has taken hold of me?”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

काली ज़ुल्फ़ों को देखकर मैं उन पर मुग्ध और दीवाना हो गया; मुझ दीवाने पर यह कैसा पागलपन या अजीब जुनून सवार हो गया है?

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब की काली ज़ुल्फ़ों को अक्सर एक दिलकश जाल की तरह देखा गया है, जो आशिक के होश-ओ-हवास चुरा लेती है। इस शेर में शायर कहता है कि उन स्याह गेसुओं की बस एक नज़र ने उसे ऐसा दीवाना और फ़िदा किया कि वह अपनी सुध-बुध खो बैठा। खुद से यह मासूम सवाल पूछना कि 'यह मुझे कैसा सौदा (पागलपन) हो गया', प्रेम की उस मीठी बेबसी को दिखाता है जहाँ अक्ल पूरी तरह दिल के आगे हार मान लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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