बल्कि ये बोलना तकल्लुफ़ है हम ने उस को सुना है या देखा?

“Nay, to speak thus is mere affectation—did we ever truly hear that beloved, or ever really see?”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

बल्कि यह कहना भी महज़ एक तकल्लुफ़ या औपचारिकता है कि क्या हमने सचमुच कभी उसे सुना या देखा भी है?

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब की हक़ीक़त और अपनी यादों के दरमियां एक अजब कशमकश में है। वो कहते हैं कि यह दावा करना ही एक महज़ तकल्लुफ़ या दिखावा है कि हमने उन्हें अपनी आँखों से देखा या कानों से सुना था। महबूब का वजूद इतना तिलिस्मी और गहरा है कि होश-ओ-हवास उस अहसास को बयां ही नहीं कर सकते, मानो सब कुछ सिर्फ़ एक ख़ूबसूरत ख़्वाब रहा हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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