इमकान से बाहर है तेरी कुन्ह का पाया वर्ना दिल-ए-आगाह मेरा तंग न होता

“To fathom Your true essence lies beyond the realm of possibility; / else this knowing heart of mine would never be so sorely distressed.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

आपकी वास्तविकता और तत्व की थाह पाना संभव नहीं है, वर्ना मेरा जागरूक और ज्ञानी हृदय इस तरह तंग और बेचैन न होता।

विस्तार

इस शेर में शायर उस असीम सच्चाई के सामने अपने दिल की लाचारी और बेचैनी बयाँ कर रहे हैं। वे कहते हैं कि महबूब या ईश्वर की असल हक़ीक़त को पूरी तरह पा लेना इंसानी समझ के दायरे से बाहर है। अगर दिल नासमझ होता तो शायद बेख़बर रहता, लेकिन एक जागृत और समझदार दिल ही यह जानकर बेबस महसूस करता है कि यह राज़ कितना अथाह है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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