असरार-ए-हक़ीक़त के ख़बरदार जो होते हफ़्ताद-ओ-दो मिल्लत में कभी जंग न होता

“Had they but known the hidden mysteries of Truth, between the seventy-two sects there would never be war.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

यदि लोग परम सत्य के रहस्यों से वाकिफ़ होते, तो बहत्तर फिरकों के बीच कभी कोई युद्ध न होता।

विस्तार

इस खूबसूरत शेर में शायर धार्मिक और वैचारिक झगड़ों के पीछे की असल वजह समझा रहे हैं। 'हफ़्ताद-ओ-दो मिल्लत' यानी बहत्तर फिरके या संप्रदाय, जो अक्सर एक-दूसरे की राहों को गलत समझकर आपस में उलझते रहते हैं। शायर बड़ी नज़ाकत से कहते हैं कि यह सारी कड़वाहट सिर्फ़ नासमझी का नतीजा है; अगर इंसान रूहानी सच की गहराई और ईश्वर के असली स्वरूप को जान ले, तो सारे मतभेद पल भर में मिट जाएँ।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.