गर पर्दा-ए-ग़फ़लत को तू हम से न उठाता ऐ इश्क़ नियाज़ आगे तेरे संग न होता

“Had you not lifted from our eyes the veil of heedlessness, / O Love, supplication would never have struck against a stone.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

ऐ इश्क़, अगर तूने हमसे ग़फ़लत का पर्दा न हटाया होता, तो नियाज़ तेरे आगे यूँ पत्थर न बना होता।

विस्तार

शायर इश्क़ से एक बड़ा नाज़ुक शिकवा करते हुए कहता है कि अगर तूने हमारी आँखों से बेख़बरी का पर्दा न हटाया होता, तो हम इस हाल को न पहुँचते। इश्क़ ने हमें दुनियादारी की नींद से जगा तो दिया, लेकिन बदले में एक संगदिल महबूब या बेज़ुबान मूरत के आगे सर पटकने को मजबूर कर दिया। यहाँ 'नियाज़' शायर का नाम भी है और आजिज़ी व इबादत भी—यानी इश्क़ की दी हुई इस समझ ने आखिरकार हमें एक पत्थर के सामने ला खड़ा किया जहाँ से कोई जवाब नहीं मिलता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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