“তোমার হাতে কঙ্কণ বাজে, তোমায় দেখি কাজে কাজে, তুমি ওঠো মনে মনে, সকল কাজের ফাঁকে ফাঁকে॥”
तुम्हारे हाथों में कंगन बजते हैं, मैं तुम्हें कामों में लगा देखता हूँ। तुम मेरे मन में सभी कामों के बीच-बीच में उभर आती हो।
यह दोहा खूबसूरती से दर्शाता है कि कोई व्यक्ति वक्ता के विचारों में कितनी गहराई से समाया हुआ है। यह प्रिय की कलाई में चूड़ियों की मधुर खनक का चित्रण करता है, जो उनकी सुंदर उपस्थिति का प्रतीक है। वक्ता लगातार इस व्यक्ति को हर काम में लगन से लीन देखता है, मानो वे रोज़मर्रा के जीवन के हर पहलू में बुने हुए हों। व्यस्त दिनचर्या के बीच भी, प्रिय की छवि या स्मृति वक्ता के मन में अनायास ही उभर आती है, कार्यों के बीच मिलने वाले शांत पलों में। यह एक ऐसी गहरी और पोषित उपस्थिति का कोमल भाव है, एक ऐसा प्रेम जो हर पल को भर देता है, चाहे वह सक्रिय हो या चिंतनशील, प्रिय को अविस्मरणीय बना देता है।
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