আমি চিনি গো চিনি তোমারে, ওগো বিদেশিনী। তুমি থাক সিন্ধুপারে, ওগো বিদেশিনী॥

“আমি চিনি গো চিনি তোমারে, ওগো বিদেশিনী। তুমি থাক সিন্ধুপারে, ওগো বিদেশিনী॥”

— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

मैं तुम्हें पहचानता हूँ, हे विदेशी स्त्री। तुम समुद्र पार रहती हो, हे विदेशी स्त्री।

विस्तार

यह खूबसूरत दोहा, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के एक मशहूर गीत से है, एक गहरे और रहस्यमय पहचान की बात करता है। बोलने वाला किसी को "हे विदेशिनी" कहकर संबोधित करता है, यह स्वीकार करते हुए कि वह समुद्र पार रहती है। फिर भी, इस शारीरिक दूरी के बावजूद, एक तत्काल और गहरी पहचान है: "मैं तुम्हें जानता हूँ, सचमुच जानता हूँ।" यह एक ऐसी परिचितता की भावना है जो भौगोलिक सीमाओं से परे है, जो एक आध्यात्मिक या भावनात्मक संबंध का सुझाव देती है जो दूरी को धता बताता है। यह खूबसूरती से इस विचार को पकड़ता है कि कुछ रिश्ते इतने मजबूत होते हैं कि वे एक दूर के अजनबी को एक अंतरंग परिचित आत्मा जैसा महसूस कराते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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