सुन के बुरा न मानिए सच को न झूट जानिए ज़िक्र है कुछ गिला नहीं बात है नेश्तर नहीं

“Take no offense at hearing this, nor deem the truth a lie; it is merely a mention, not a complaint—a word, not a lancet's blade.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

यह सुनकर बुरा मत मानिए और सच को झूठ मत समझिए। यह महज़ एक ज़िक्र है कोई शिकायत नहीं, बस एक बात है कोई चुभने वाला नेश्तर नहीं।

विस्तार

इस शेर में शायर बहुत नज़ाकत से अपनी बात रखते हुए मुख़ातब से गुज़ारिश कर रहा है कि वह सच को सुनकर नाराज़ न हों। यहाँ 'ज़िक्र' और 'गिला' (शिकायत) तथा 'बात' और 'नेश्तर' (ज़ख़्म देने वाले नश्तर) का बड़ा ख़ूबसूरत फ़र्क़ दिखाया गया है। शायर का मक़सद किसी को चोट पहुँचाना या इल्ज़ाम लगाना नहीं, बल्कि बिना किसी कड़वाहट के सिर्फ़ अपने दिल की हक़ीक़त बयां करना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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