ख़ुद जो ग़म हैं तो आइना हैराँ किस ग़ज़ब का सिंघार कर बैठे

“When grief itself is what they wear, the mirror stands amazed; in what dreadful, wondrous beauty have they adorned themselves!”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

जब वे स्वयं ही ग़म का रूप बने हुए हैं, तो आईना भी हैरान है कि उन्होंने यह कैसा क़यामत-ख़ेज़ शृंगार कर लिया है।

विस्तार

यह शेर ग़म की एक अनोखी और सम्मोहक ख़ूबसूरती को बयां करता है। आमतौर पर लोग संवरने के लिए बनाव-शृंगार का सहारा लेते हैं, लेकिन यहाँ रंज-ओ-अलम को ही इस तरह ओढ़ लिया गया है कि अक्स दिखाने वाला आईना भी भौंचक्का रह गया है। शायर कहना चाहते हैं कि गहरा दर्द कभी-कभी इंसान को एक ऐसा पुरअसर, उदास और गहरा हुस्न दे देता है जिसकी चमक किसी भी पारंपरिक साजो-सामान से कहीं बढ़कर होती है।

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