ये कह के उठ गई बालीं से मेरी शम-ए-सहर तमाम हो गई शब और तुझे क़रार नहीं

“Saying this, the morning candle left my pillowside: The night has reached its end, yet you have found no peace.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

सुबह की शमा मेरे सिरहाने से यह कहकर चली गई कि पूरी रात बीत गई, मगर तुम्हें अब तक चैन नहीं मिला।

विस्तार

इस शेर में एक बेहद मार्मिक दृश्य है, जहाँ रात भर जलने वाली शमा सुबह बुझते-बुझते शायर के सिरहाने से विदा ले रही है। वह जाते-जाते जैसे दर्द भरी हैरानी से कहती है कि मेरी जलने की मियाद और यह लंबी रात तो ख़त्म हो गई, मगर तुम्हारी बेचैनी अब भी ढलने का नाम नहीं ले रही। यह उस बेइंतहा तड़प का बयान है, जहाँ वक़्त और साथी भी साथ छोड़ देते हैं लेकिन दिल का दर्द शांत नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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