“So choking now is this upheaval in the world's altered state, / That songs burst from the nightingales' beaks turned into wails of pain.”
दुनिया के हालात का बदलाव अब इस कदर दमघोंटू हो गया है कि बुलबुलों की चोंच से उनके तराने भी चीख़ और मातम बनकर निकल रहे हैं।
शायर कहते हैं कि ज़माने का माहौल इस कदर दमघोंटू और तकलीफ़देह हो चुका है कि अब हुस्न और राहत की कोई गूंज नहीं बची। बुलबुल, जो अपनी चोंच से मोहब्बत के मीठे नग़मे छेड़ने के लिए जानी जाती है, इस घुटन भरे दौर में गाती है तो उसके सुर चीख़ और फ़रियाद बनकर निकलते हैं। यह शेर दिखाता है कि जब हालात बहुत ज़ालिम और नासाज़ हो जाएं, तो सबसे नाज़ुक और ख़ूबसूरत कला भी दर्द के मातम में बदल जाती है।
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