तूल-ए-अमल पे दिल न लगाना कि अहल-ए-बज़्म जाएँगे ना-तमाम ये अफ़्साना छोड़ कर

“Set not your heart on far-reaching hopes, for the guests of this gathering will depart, leaving this tale unfinished behind.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

लंबी उम्मीदों और अंतहीन इच्छाओं पर दिल मत लगाना, क्योंकि इस महफ़िल के लोग यह दास्तान अधूरी छोड़कर ही चले जाएँगे।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की नज़ाकत और हमारी लंबी-लंबी उम्मीदों (तूल-ए-अमल) के फ़रेब से बड़े प्यार से आगाह करता है। शायर ने इस दुनिया को एक महफ़िल की तरह देखा है, जहाँ हम सब मेहमान हैं और किसी न किसी दिन इस दास्तान को अधूरा छोड़कर चले जाना है। यह ख्याल हमें सिखाता है कि ज़िंदगी की भागदौड़ में बेजा ख्वाहिशों के पीछे भागने के बजाय, हर पल की सच्चाई और सादगी को गले लगाना चाहिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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