होंटों पे आज तक हैं शब-ए-ऐश के मज़े साक़ी का लब लिया लब-ए-पैमाना छोड़ कर

“Even today upon my lips lingers the delight of that night of bliss: forsaking the rim of the wineglass, I kissed the cupbearer's lips.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

उस ऐश की रात का मज़ा आज तक मेरे होंठों पर बना हुआ है, क्योंकि मैंने शराब के प्याले को छोड़कर साक़ी के होंठों को चूम लिया था।

विस्तार

शायर उस जादुई रात की खुमारी को याद कर रहा है जिसका असर आज भी उसके होंठों पर ताज़ा है। उसने जाम से शराब पीने के बजाय सीधे साक़ी के लबों को चूम लिया, यानी महज़ नशे के ज़रिया को छोड़ उसने हुस्न और मोहब्बत के असल स्रोत को ही अपना लिया। यह शेर महज़ मस्ती का बयान नहीं, बल्कि ज़ाहिरी दुनिया के इशारों को छोड़ हक़ीक़ी इश्क़ को गले लगाने का एक दिलकश अंदाज़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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