एहसान ले न हिम्मत-ए-मर्दाना छोड़ कर रस्ता भी चल तू सब्ज़ा-ए-बेगाना छोड़ कर

“Accept no favor, casting your manly pride aside; / Walk on your path, yet leave the stranger's greens untrod.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

अपनी मर्दाना हिम्मत और आत्मसम्मान को छोड़कर किसी का एहसान मत लो; यदि रास्ते पर भी चलना हो, तो किसी पराए की हरियाली से बचकर चलो।

विस्तार

यह शेर आत्मसम्मान और स्वाभिमान का एक खूबसूरत पैगाम देता है। शायर एक मुसाफ़िर का रूपक गढ़ते हुए कहता है कि चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, किसी पराए की हरी-भरी घास ('सब्ज़ा-ए-बेगाना') पर कदम रखकर उसका एहसान मत लो। जिंदगी के सफर में अपनी हिम्मत और खुददारी को दांव पर लगाकर मिलने वाली राहत असल में रूह पर एक बोझ बन जाती है। इसलिए, अपनी ताकत पर भरोसा रखते हुए अपने ही पथरीले रास्ते पर सिर उठाकर चलना असली शान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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