हम ने माना कि मिला मुल्क-ए-जहाँ न रहे हम तो जहाँ क्या होगा

“Even grant that the realm of the world is won; if we are no more, what will become of the world?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मान लीजिए कि हमें पूरी दुनिया की सल्तनत मिल भी जाए, लेकिन अगर हम ही ज़िंदा न रहे तो फिर इस दुनिया का हमारे लिए क्या मतलब रह जाएगा।

विस्तार

यह शेर दुनियावी हुकूमत और दौलत की नश्वरता पर एक गहरी बात कहता है। शायर का मानना है कि अगर इंसान पूरी दुनिया की सल्तनत भी जीत ले, तो उसका क्या हासिल जब वह खुद ही बाकी न रहे। दरअसल, इस जहान की सारी खूबसूरती और चमक हमारे वजूद और अहसास से ही कायम है; हमारे बिना यह सारा संसार बिल्कुल बेमानी और वीरान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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