चोटी की गुंधावट कहीं दिखलाती हो नैरंग — नज़ीर अकबराबादी
“Somewhere the braided plait displays its wondrous art, Somewhere your scattered tresses stage their dazzling show.”
अर्थ
कहीं तुम्हारी चोटी की गुँधावट अपना अद्भुत रंग दिखाती है, तो कहीं तुम्हारी बिखरी हुई ज़ुल्फ़ें अपना तमाशा रचाती हैं।
विस्तार
यह शेर महबूब के बालों के अलग-अलग अंदाज़ की तारीफ़ करता है। कभी आप अपनी चोटी को सलीके से गूँथती हैं, और उसकी वह बुनावट एक अनोखा जादू, एक हैरत भरी ख़ूबसूरती दिखाती है। और कभी आप अपनी ज़ुल्फ़ों को खुला, बिखरा हुआ छोड़ देती हैं, और वह बेतरतीब, आज़ाद अंदाज़ भी अपने आप में एक प्यारा तमाशा बन जाता है। शायर कहना चाहता है कि चाहे बाल सँवरे हों या बिखरे, हर हाल में उनमें अपना ही आकर्षण है। सलीके में भी सुंदरता है और बिखराव में भी। दोनों ही रूप मनमोहक हैं, और महबूब मानो इन अंदाज़ों से खेलता है, हर हाल में देखने वाले को मोह लेता है।
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