વળી સંધાઓનું, અસલ જિવતું એક મુળ તો. ૩ કિયું ડાળૂં પ્હેલું, કંઈ ન પરખાએ શ્રમ કરે,

“And of all bonds, one original living root exists.Which branch came first, cannot be discerned, for all the toil.”

— नर्मद
अर्थ

सभी संबंधों की एक मूल जीवित जड़ है। कितना भी परिश्रम किया जाए, यह पहचानना असंभव है कि कौन सी शाखा पहले बनी।

विस्तार

एक विशाल पेड़ की कल्पना करें जिसकी अनगिनत शाखाएँ हैं। यह दोहा हमें खूबसूरती से याद दिलाता है कि इन सभी विभिन्न भागों के बावजूद, सब कुछ एक मूल, जीवित जड़ से निकलता है। यह बताता है कि एक बार जब हम इस गहरे संबंध को समझ लेते हैं, तो तो यह बताना असंभव हो जाता है कि कौन सी शाखा पहले निकली, या कौन सा हिस्सा दूसरे से अधिक मेहनत कर रहा है। सभी प्रयास, सभी अभिव्यक्तियाँ, अंततः उस एक, मौलिक स्रोत से जुड़ी और पोषित होती हैं। यह अस्तित्व की एकता और हर चीज़ के साझा मूल के बारे में एक गहरा विचार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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