ગયો ખાલી થઈ હોજ, મોજ શી શીરે જમતા! એક અંગીનાં અંગ, નંગ કુંદન બન્યો છે;

“The tank has emptied out, what joy in feasting at the head?A part of that beloved form, the gem has turned to pure gold.”

— नर्मद
अर्थ

हौज खाली हो गया है, अब शीर्ष पर बैठकर दावत करने में क्या आनंद? उस प्रिय रूप का एक अंग, वह नगीना अब कुंदन बन गया है।

विस्तार

यह दोहा एक सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है: जब एक तालाब सूख जाता है, तो उस पर दावत खाने का क्या मज़ा? यह बाहरी सुखों की क्षणभंगुर प्रकृति की ओर इशारा करता है। फिर भी, यह एक गहरा और प्रेरणादायक विरोधाभास प्रस्तुत करता है। यह कहता है कि एक साधारण सी चीज़ का हिस्सा, जैसे एक साधारण नग, शुद्ध कुंदन सोना बन सकता है। यह ज्ञान हमें याद दिलाता है कि भले ही बाहरी सुख-सुविधाएं कम हो जाएं या जीवन में चुनौतियाँ आएं, फिर भी हमारे भीतर या जीवन के मूल में एक आंतरिक शक्ति और एक अलौकिक प्रक्रिया है, जो हमें परिष्कृत कर सकती है और हमें वास्तव में अनमोल और अमूल्य बना सकती है। यह क्षणिक परिस्थितियों से परे स्थायी मूल्य खोजने के बारे में है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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