ताले-ए-बरगश्ता मेरी क्या हरन — मोमिन ख़ाँ मोमिन

ताले-ए-बरगश्ता मेरी क्या हरन मुल्क-ए-अदम से न फिर अहू गया

“My fortune is reversed—what deer, what gazelle of mine? From the land of nothingness no deer has ever turned back.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मेरा भाग्य उल्टा हो गया है—अब कैसा हिरन, कैसा मृग? अदम (शून्यता) की भूमि से तो कोई हिरन कभी लौट कर नहीं आया।

विस्तार

शायर अपनी उलटी और बदकिस्मत तक़दीर की बात करता है। वह कहता है कि उसकी बदनसीबी इतनी पूरी है कि हिरन भी, जब एक बार अदम यानी न होने के देश में चला जाता है, तो फिर कभी लौटकर नहीं आता। यहाँ हिरन किसी तेज़ और जीवित चीज़ का प्रतीक है, फिर भी वह उस आख़िरी ठिकाने से बच नहीं सकता। यह शेर धीरे से इस दुख को बयान करता है कि किस्मत कभी इतनी बेरुख़ हो जाती है कि वापसी का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद लगने लगता है। यह बदकिस्मती, खोने और कुछ जुदाइयों के आख़िरीपन पर एक शांत सोच है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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