आई ग़ज़ाल-ए-चश्म सदा मेरी दाम में — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“The gazelle-eyed ones kept falling always into my snare— I remained the hunter, rarely was I the captured prey.”
अर्थ
मेरे जाल में हमेशा हिरन जैसी आँखों वाली सुंदरियाँ फँसती रहीं; मैं ही शिकारी बना रहा, कभी-कभार ही मैं किसी का बंदी हुआ।
विस्तार
इस शेर में शायर शिकारी और शिकार के खेल से बात कहते हैं। वे कहते हैं कि हिरन जैसी सुंदर आँखें हमेशा मेरे जाल में, मेरे फंदे में आती रहीं। फिर भी मैं हमेशा शिकारी ही बना रहा, और खुद बहुत कम बार पकड़ा गया। इसमें एक हल्का सा गर्व है। वे खुद को ऐसा दिखाते हैं जो आसानी से दिल जीत लेता था, जो फंदा बिछाता था, खुद उसमें नहीं फँसता था। पर ध्यान से सुनें तो एक चुपचाप अकेलापन भी महसूस होता है। हमेशा शिकारी रहने का मतलब है कभी पूरी तरह न समर्पण करना, कभी खुद प्रेम में न बह जाना। तो यह पंक्ति उनके आकर्षण को सराहती है, पर यह भी बताती है कि हमेशा संभले रहकर उन्होंने क्या खोया।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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