क्यों काम तलब है मेरी ज़ारी गर उन — मोमिन ख़ाँ मोमिन

क्यों काम तलब है मेरी ज़ारी गर उन अकाम से देखा है कहीं काम निकलता

“Why should my pleading beg for desire's reward from them— have you ever seen a task fulfilled by one who acts not?”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मेरी गिड़गिड़ाहट उनसे कामना का फल क्यों माँगे—भला किसी ने निष्क्रिय व्यक्ति से कोई काम पूरा होते देखा है?

विस्तार

शायर एक कोमल, हल्का-सा सवाल पूछता है। मेरी आह और गिड़गिड़ाहट भला किसी काम की उम्मीद क्यों करे? कभी देखा है कि रोने से कोई काम बना हो? यहाँ 'काम' शब्द के दो अर्थ हैं, एक है कार्य और दूसरा है चाहत, और शायर इसी पर खेलता है। वह सोचता है कि उसके आँसू नतीजे की माँग क्यों करें, जैसे दुःख कोई औज़ार हो जो परिणाम निकाल दे। इसमें एक शांत स्वीकार है, यह समझ कि महबूब के सामने रोने-गिड़गिड़ाने से कुछ बदलता नहीं। फिर भी इसमें एक नरमी है, शायर अपनी बेबस चाहत पर खुद ही मुस्कुरा रहा है, यह जानते हुए भी कि इश्क़ हमें उम्मीद करने पर मजबूर कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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