अपनी अंदाज़ की भी एक ग़ज़ल पढ़ मोमिन — मोमिन ख़ाँ मोमिन

अपनी अंदाज़ की भी एक ग़ज़ल पढ़ मोमिन आख़िर इस बज़्म में कोई तो सुख़न्दान होगा

“Recite one ghazal too in your own style, O Momin— surely in this gathering someone will know the worth of verse.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

ऐ मोमिन, अपने अंदाज़ की भी एक ग़ज़ल पढ़ो; आख़िर इस महफ़िल में कोई न कोई तो सुख़न को पहचानने वाला होगा।

विस्तार

यहाँ मोमिन खुद को हौसला देते हैं कि अपनी ही खास शैली में एक ग़ज़ल पढ़ो, दूसरों की नक़ल मत करो। वे खुद को भरोसा दिलाते हैं कि इस महफ़िल में भी ज़रूर कोई न कोई सच्चा सुख़नशनास यानी शायरी का पारखी होगा। यह आत्मविश्वास का एक कोमल पल है। शायर खुद को याद दिलाते हैं कि भीड़ को खुश करने के लिए अपनी आवाज़ को फीका मत करो। सुनने वालों में कहीं न कहीं कोई ऐसा दिल ज़रूर होगा जो तुम्हारे शब्दों की सुंदरता को समझेगा। इसलिए अपने अंदाज़ में गाओ, और यक़ीन रखो कि तुम्हारी कला अपने क़द्रदान तक पहुँचेगी।

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