गर तेरी खंजर-ए-मिज़गान नी किया क़त्ल मुझी — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“If your dagger-like eyelashes do not slay me outright, What use then is the Angel of Death, and for what shall he be sacrificed?”
अर्थ
अगर तेरी खंजर जैसी पलकों ने मुझे पूरी तरह क़त्ल न किया, तो फिर मौत के फ़रिश्ते का क्या काम और वह किस पर क़ुर्बान होगा।
विस्तार
शायर अपने महबूब से बड़े प्यार और शरारत के साथ कह रहा है। वह कहता है कि अगर तुम्हारी पलकों के खंजर ने मुझे मार दिया होता, तो मैं इश्क़ में ही मर जाता, यही सबसे मीठी मौत होती। पर तुमने मुझे वह मौत नहीं दी। अब मेरी जान लेने के लिए मौत के फ़रिश्ते को आना पड़ेगा। और शायर को उस फ़रिश्ते पर तरस आता है, क्योंकि किसी की जान लेना कितना भारी काम है। बेचारे मलक-उल-मौत को कितनी मेहनत, कितनी क़ुर्बानी देनी पड़ेगी, सिर्फ़ इसलिए कि तुमने एक नज़र से यह काम करने से इनकार कर दिया।
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