एक ही जल्वा-ए-मह्रू में हुआ सौ नगरी — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“In but a single glimpse of that fair face a hundred towns were made, The robe of patience, torn to shreds—what ruin, say, shall thus be laid?”
अर्थ
उस सुंदर चेहरे की एक ही झलक में सैकड़ों नगर बस गए; सब्र का वस्त्र फट गया और कहते हैं कि यही विनाश का कारण होगा।
विस्तार
यह शेर सुंदरता की गहरी शक्ति की बात करता है। महबूब के चाँद जैसे चमकते चेहरे की एक ही झलक में मानो सौ नगरियाँ जाग उठती हैं, जैसे पूरी दुनिया उस एक दृश्य से हिल जाती हो। फिर शायर धैर्य की ओर मुड़ता है। वह कहता है कि उस पल में सब्र का जामा फट जाता है। जब सुंदरता इतनी अचानक और इतनी पूरी तरह सामने आती है, तो दिल थम नहीं पाता। सारा संयम टूट जाता है और बेचैन मन बस महबूब को ही चाहता है। यह याद दिलाता है कि सच्ची सुंदरता का एक क्षण हमारे भीतर सब कुछ हिला सकता है।
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