निस्बत-ए-ऐश से हूँ नज़ा में गिर्यां यानी — मोमिन ख़ाँ मोमिन

निस्बत-ए-ऐश से हूँ नज़ा में गिर्यां यानी है यह रोना कि दहन गोर का ख़न्दान होगा

“In connection with delight, I weep in my death-throes, meaning— this is such a weeping that the grave's mouth will break into a smile.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

सुख-आनंद के सम्बन्ध में मैं मृत्यु की पीड़ा में रो रहा हूँ, अर्थात् यह रोना ऐसा है कि इससे क़ब्र का मुँह हँस पड़ेगा।

विस्तार

इस शेर में शायर मौत की घड़ी में पड़ा है, फिर भी रो रहा है, मगर यह रोना दुख का नहीं बल्कि किसी खुशी से जुड़ा है। वह कहता है कि मेरे आँसू ऐश यानी आनंद से रिश्ता रखते हैं। क्यों? क्योंकि मेरी मौत से मेरी कब्र भर जाएगी, और वह कब्र मानो मुस्कुरा उठेगी। सोचिए, कब्र का मुँह खुला हुआ इंतज़ार कर रहा है। जब शायर उसमें दफन होगा, तो कब्र का वह मुँह खुशी से हँस पड़ेगा। इसलिए उसका रोना मानो एक खुशी भरा समर्पण है। वह खुद को सौंप देता है ताकि मिट्टी भी खुश हो जाए। यह एक मीठा-कड़वा खयाल है, जिसमें मौत, आँसू और एक हल्की मुस्कान एक साथ घुले हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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