उस नक़्श-ए-पा की सजदा ने क्या क्या किया ज़लील — मोमिन ख़ाँ मोमिन

उस नक़्श-ए-पा की सजदा ने क्या क्या किया ज़लील मैं गोचा-ए-रक़ीब में ही सर के बल गया

“How that footprint's prostration brought me low and disgraced, Into my rival's very corner, head-first, I fell down low.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

उस पाँव के निशान को सजदा करने ने मुझे कितना ज़लील किया; मैं अपने रक़ीब के ही कोने में सिर के बल जा गिरा।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने आप पर और इश्क़ की बेबसी पर हँसता है। उसने महबूब के क़दमों के निशान को इतने शौक़ से सजदा किया कि यह पूजा उसे ज़लील करती चली गई। और यह झुकना उसे कहाँ ले गया? सीधे अपने रक़ीब की गली में, जहाँ वह सर के बल जा गिरा। इस मज़ाक़ के नीचे एक हल्की सी तकलीफ़ भी है। इश्क़ इंसान से उसका सारा ग़रूर और इज़्ज़त छीन लेता है। शायर मानता है कि उसकी चाहत उसे उसी जगह ले आई जहाँ वह कभी नहीं जाना चाहता था। यह बताता है कि मोहब्बत कैसे हमें चुपचाप बेबस बना देती है।

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