फोड़ा था दिल न था यह सू-ए-पुर-ख़लल गया — मोमिन ख़ाँ मोमिन

फोड़ा था दिल न था यह सू-ए-पुर-ख़लल गया जब नहीं साँस की लगी दम ही निकल गया

“It was a boil, not a heart—this wound so full of flaw; when the breath no longer held, the very life slipped away.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

यह दिल नहीं बल्कि एक फोड़ा था, जो दोष और विकार से भरा हुआ था; जब साँस ने साथ नहीं दिया तो दम ही निकल गया और जान चली गई।

विस्तार

शायर अपने दिल को एक फोड़े से जोड़ रहा है, एक ऐसा घाव जो दर्द और तकलीफ़ से भरा हुआ है। उसका दिल कभी चैन का ठिकाना नहीं था, बल्कि एक रिसता हुआ ज़ख़्म था। वह कहता है कि यह दिल इतना नाज़ुक और दुख से भारी था कि ज़रा सी तकलीफ़ भी सहन नहीं कर सका। जैसे ही साँस एक पल के लिए अटकी, उसकी जान ही निकल गई। यानी उसका दिल इतना कमज़ोर और ग़म से बोझिल था कि छोटी सी हलचल भी उसे ख़त्म करने के लिए काफ़ी थी। यह उस रूह की बात है जो दुख से इतनी थक चुकी है कि एक रुकी हुई साँस भी आख़िरी बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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