किस मर्तबा थी हसरत-ए-दीदार मिरे साथ
जो फूल मिरी ख़ाक से निकला निगराँ था
“What status was the longing for your sight with me? / The flower that sprouted from my ashes was watchful.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे साथ आपकी झलक की चाहत किस स्तर की थी, कि जो फूल मेरी राख से निकला वह निगरानी कर रहा था।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की गहराई और रहस्य को बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि मेरे लिए यह चाहत किस मर्तबे की थी? वे अपने महबूब से कहते हैं कि तुम्हारा प्यार तो ऐसा है, जैसे कोई फूल मेरी ही राख से निकला हो और मुझ पर निगराँ हो। यह दिखाता है कि उनका प्यार सिर्फ़ भावना नहीं, बल्कि एक जीवन-दायिनी, जादुई बंधन है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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