ज़ेर-ए-फ़लक जहाँ टक आसूदा 'मीर' होते — मीर तक़ी मीर
“In the expanse of the sky, where my eyes are restless, 'Mir', / I have never seen such a glimpse of earth's surface.”
अर्थ
आसमान के विस्तार में, जहाँ मेरी आँखें बेचैन हैं, मिर्ज़ा ने कभी धरती की सतह का ऐसा नज़ारा नहीं देखा।
विस्तार
यह बहुत गहरा शेर है, जो मिर्ज़ा मीर ने लिखा है। शायर कह रहे हैं कि ज़मीन, आसमान, और यह पूरी कायनात... जब सब कुछ शांत और आबाद था... तब भी उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा था। ऐसा कोई दर्द या उथल-पुथल जो ज़मीन में दरार जैसा हो... ऐसा कोई नज़ारा नहीं था। इसका मतलब है कि जो एहसास या गम शायर को हो रहा है... वह इतना गहरा और अनोखा है कि किसी भी प्राकृतिक घटना से कहीं ज़्यादा है।
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