यकसू कुशादा-रवी पर चीं नहीं जबीं भी — मीर तक़ी मीर

यकसू कुशादा-रवी पर चीं नहीं जबीं भी हम छोड़ी महर उस की काश उस को होवे कीं भी

“When the Kusha flower, the Sun, and the Moon are not in my heart, I would wish that I had left my beloved's love for them.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जब कुश का फूल, सूरज और चाँद मेरे मन में नहीं हैं, तो मैं यह कामना करता हूँ कि मैंने अपने प्रिय के प्रेम को उनके लिए छोड़ दिया होता।

विस्तार

इस शेर में शायर ने विरह की एक बहुत गहरी बात कही है। वह कहते हैं कि महबूब का रास्ता, उनका ठिकाना... कहीं खाली नहीं है। यानी, वो अभी भी किसी और के साथ हैं। इसलिए, शायर को लगता है कि सिर्फ यादें या कोई तोहफा छोड़ देना काफी नहीं है। असली तड़प तो यह है कि काश वो महबूब... इस दुनिया से, इस ज़िंदगी से, हमेशा के लिए दूर हो जाए! यह अलगाव की पराकाष्ठा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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